Posted By mohini
WHO का दावा : बच्चों में तेजी से फैल रही है ये खतरनाक बीमारी, ये हैं बचने के तरीके

आजकल जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है वैसे वैसे लोगों में बीमारियाँ भी बढ़ रही हैं. इन बीमारियों की चपेट में बड़े ही नहीं बच्चे भी आ रहे हैं. WHO की रिसर्च में पता लगा है कि बच्चों में तेज से ये खतरनाक बीमारी फ़ैल रही है. बढ़ते प्रदुषण से बच्चों में अस्थमा जैसी खतरनाक बीमारी फ़ैल रही हैं. जो बच्चे ज्यादा समय तक प्रदुषण वाले धुएं में रहते हैं उनकी सांस की नली में ये गन्दा धुँआ जमने लगता है. अस्थमा का खतरा बच्चो में बहुत तेजी से फ़ैल रहा है. अस्थमा किसी तरह की एलर्जी की वजह से भी हो सकता है.

WHO के मुताबिक भारत में लगभग 2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं लेकिन इस समय ये समस्या बच्चो में ज्यादा देखने को मिल रही हैं. बच्चों की सांस लेने वाली नली बहुत छोटी होती हैं इस वजह से प्रदुषण में रहने से गन्दा धुंआ उनकी नली में जमने लगता है और उन्हें इस वजह से अस्थमा का शिकार होना पड़ रहा है. प्रदुषण ही नहीं पेनलेस डिलीवरी में इसका एक बड़ा कारण बन रहा है. आजकल महिलाएं पेनलेस डिलीवरी की चाह में सिजेरियन डिलीवरी करवाना पसंद करती हैं.

क्यों है सिजेरियन डिलीवरी बच्चों में अस्थमा होने का कारण ?

बता दें सिजेरियन डिलीवरी के केस में बच्चे के फेफड़े सही तरह से डेवलेप नहीं हो पाते जो और सामान्य बच्चों के मुकाबले कमजोर होते हैं. सिजेरियन बच्चों को डेवलेप करने के लिए स्टेरॉयड दिया जाता है और ऐसे बच्चो को अस्थमा होने का खतरा ज्यादा रहता है. पूरे देश में अस्थमा से ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है.

अस्थमा का इलाज़

अस्थमा के लिए सबसे बेहतर इलाज़ है इनहेलर. इनहेलर सीधा फेफड़ों तक दावा पहुँचाना का काम करता है. इनहेलर का सही तरह से प्रयोग करना चाहिए.  कुछ घरेलू नुस्खे भी अपना सकते हैं जो इस बीमारी के लिए कारगर साबित होंगे.

अस्थमा के लक्षण

सांस फूलना

सिर भारी-भारी लगना

सीने में दर्द होना

सुबह-शाम खांसी आना

 

कैसे करें अस्थमा से बचाव

प्रदूषण में ज्यादा जाने से बचें

एंटीबायोटिक दवा उपयोग कम करें

जंक फूड का प्रयोग ना करें